जिन्दगी के सवाल

कहीं भी नज़र दौड़ाओ, भीड़ नज़र आएगी,
फिर भी इतनी भीड़ में आदमी तन्हा क्यों है?
करते रहते हैं जिन्दगी में, खुशी की तलाश, 
मगर खुशी के इस सफर में, चेहरे पर इतना मलाल क्यों है?
हाशियों में रहकर भी, महफूज नहीं हम तो,
है हसरत हमारी जीने की, फिर जीना इतना मुहाल क्यों है?
लगे रहते है हम, ज्यादा कि तलाश में
मगर सुकून का, जिन्दगी में इतना अकाल क्यों है?
भर जाता है पेट, मगर क्यों ये लालच नहीं जाता?
जिन्दगी का हर एक कदम सवाल क्यों है?....

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